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परिचय

परिचय : द्वारिका प्रसाद अग्रवाल
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जन्म : 18 दिसम्बर 1947  बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में.
शिक्षा : वाणिज्य एवं विधि स्नातक, हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर.

अन्य योग्यता : सर्टिफ़ाइड मेम्बर ट्रेनर : जूनियर चेंबर इंटरनेशनल  (प्रशिक्षक : मानव-व्यवहार प्रबन्धन और व्यक्तित्व विकास).

प्रकाशित पुस्तकें : 
*आत्मकथा के तीन खंड  : 
(1) ‘कहाँ शुरू कहाँ खत्म’ 
(2) 'पल पल ये पल' 
(३) 'दुनिया रंग बिरंगी'

*यात्रा वृत्तान्त : 'मुसाफिर ....जाएगा कहाँ'
*कहानी संग्रह : 'याद किया दिल ने"
*उपन्यास : 'मद्धम मद्धम'
*लेख संग्रह : 'ये जीवन है'
*कथा संग्रह : 'तेरी मेरी कहानी है'
* Autobiography : 'Journey by Chance'  : Available in Kindle 

अन्य प्रकाशन : धर्मयुग, दिनमान, नवभारत टाइम्स, मंतव्य, समहुत, व्यंग्य धारा, प्रणाम पर्यटन, सरस्वती सुमन, संकल्प आदि पत्रिकाओं में विविध-विषय पर लेखों व कहानियों का प्रकाशन. 

ई. मेल  : dpaparishkaar@gmail.com
सम्पर्क सूत्र : होटल श्री जगदीश लॉज, करोनाचौक, सदर बाज़ार, बिलासपुर 495001 (छत्तीसगढ़).
मोबाइल : 9893123663
              9131667998

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तब जब अब जबलपुर ============== ( १)           अपनी ससुराल होने के कारण मुझे शहर जबलपुर अत्यंत प्रिय है क्योंकि वहाँ दामाद होने के कारण मेरे मान-सम्मान की स्थायी व्यवस्था बनी हुई है यद्यपि सास-श्वसुर अब न रहे लेकिन तीन में से दो भाई , मदन जी और कैलाश जी , मुझे अभी भी अपना जीजा मानते हुए अपने माता-पिता की कोमल भावनाओं का प्रसन्नतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं। मैं पहली बार जबलपुर विवाह में बाराती बन कर दस वर्ष की उम्र (सन 1957) में गया था। मोहल्ला हनुमानताल , सेठ गोविंद दास की ' बखरी ' के कुछ आगे , जैन मंदिर के पास , सेठ परसराम अग्रवाल के घर , जहां से उनकी भतीजी मंदो का ब्याह मेरे बड़े भाई रूपनारायण जी के साथ हुआ था। उन्हीं दिनों सेठ गोविंद दास की ' बखरी ' के बाजू में स्थित एक घर में एक वर्ष की एक नहीं सी लड़की जिसका नाम माधुरी था , वह घुटनों के बल पूरे घर में घूमती और खड़े होने का अभ्यास करती हुई बार-बार गिर जाती थी। इसी घर में 8 मई 1975 में मैं दूल्हा बनकर आया था तब माधुरी 19 वर्ष की हो चुकी थी , वे मेरी अर्धांगिनी बनी।      ...

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